संदेश

आल्हा छंद~छत्तीसगढ़ी

निज भाषा के मान ~(आल्हा छंद)
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आखर-आखर भाखा बनथे,
भाखा प्रगटे भाव विचार।
महतारी के बोली बोलव,
निज भाखा बिन सब बेकार।~1सिखव लिखव बोलव निज भाखा,
हावय येमा गुन के खान।
महतारी भाखा ला मानव,
अंतस के बड़ गरब गुमान।~2फूलँय बाढ़ँय जम्मों भाखा,
काबर करबो करन विरोध।
हमरो भाखा आगू बढ़ही,
राखन अपने अंतस बोध।~3जनमें जेखर कोरा मा हम,
वो भुँइयाँ हे सरग समान।
नान्हेंपन ले सुन-सुन लोरी,
वो भाखा हे ब्रम्ह गियान।~4लोककला अउ संस्कृति सब के ,
निज भाखा ले पाय अधार।
जतका जादा करबो सेवा,
मया बाढ़ही 'अमित' अपार।~5आवव सिखन लिखन बन तपसी,
साधक बनके छंद विधान।
साहित रचव नियम के संगत,
होही जग मा तब गुनगान।~6करन साधना आखर के नित,
आखर होथे ब्रह्म समान।
सोच समझ के लिखबो थोरिक,
लिखना रचथे बेद पुरान।~7राग रंग के काटव जाला,
सत साहित मा लगै धियान।
माता सारद किरपा करहू,
पावँव गुरु ले 'अमित' गियान।~8जइसे जइसे लिखबो आगू,
आय लेखनी मा अति धार।
अदर कचर सब घुरवा जाही,
माई कोठी धरलन सार।~9लगन लगाबो करके महिनत,
सिरजाबो सरलग सब छंद।
गुरु के पाके किरपा मंतर,
लिखय सार साहित मतिमंद।~10लिखव पढ़व म…

शब्दाँजलि अटल जी को...

बेटा हिन्दुस्तान का, भारत रत्न महान।
रहे राजनेता अटल, राजनीति के शान।
राजनीति के, शान सौम्य वे, राष्ट्र पुजारी।
संघ सिपाही, पत्रकार कवि, अटल बिहारी।
अंतिम पथपर, भीष्म पितामह, बेसुध लेटा।
मौत गई ठन, शांत मुखर कवि, योद्धा बेटा।

दो कुण्डलियाँ देश के नाम

दो कुण्डलियाँ देश के नाम01-
धजा तिरंगा देश के, फहर-फहर फहराय।
तीन रंग के शान ले, बैरी घलो डराय।
बैरी घलो डराय, रहय कतको अभिमानी।
देबो अपन परान, निछावर हमर जवानी।
कहै अमित कविराय, कभू झन आय अड़ंगा।
जनगण मन रखवार, अमर हो धजा तिरंगा।02-
भुँइयाँ भारत हा हवय, सिरतों सरग समान।
सुमता के उगथे सुरुज, होथे नवा बिहान।
होथे नवा बिहान, फुलँय सब भाखा बोली।
किसिम किसिम के जात, दिखँय जी एक्के टोली।
कहे अमित कविराय, कहाँ अइसन जुड़ छँइयाँ।
सबले सुग्घर देश, सरग कस भारत भुँइयाँ।कन्हैया साहू "अमित" -भाटापारा

शिवशंकर के बिहाव ~ बरतिया वर्णन

शिवविवाह के बरतिया वर्णन - सरसी छन्द :-
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   बिकट बरतिया बिदबिद बाजँय, चाल चलय बेढ़ंग।
   बिरबिट करिया भुरुवा सादा, कोनो हे छतरंग।1।   कोनो उघरा उखरा उज्जट, उदबिदहा उतलंग।
   उहँदा उरभट कुछु नइ घेपँय, उछला उपर उमंग।2।   रोंठ पोठ सनपटवा पातर, कोनो चाकर लाम।
   नकटा बुचुवा रटहा पकला, नेंग नेंगहा नाम।3।   खरभुसरा खसुआहा खरतर, खसर-खसर खजुवाय।
   चिटहा चिथरा चिपरा छेछन, चुन्दी हा छरियाय।4।   जबर जोजवा जकला जकहा, जघा-जघा जुरियाय।
   जोग जोगनी जोगी जोंही,  बने बराती जाय।5।   भुतहा भकला भँगी भँगेड़ी, भक्कम भइ भकवाय।
   भसरभोंग भलभलहा भइगे, भदभिदहा भदराय।6।   भकर भोकवा भिरहा भदहा, भूत प्रेत भरमार।
   भीम भकुर्रा भैरव भोला, भंडारी भरतार।7।   मौज मगन मनमाने मानय, जौंहर उधम मचाय।
   चिथँय कोकमँय हुदरँय हुरमत, तनातनी तनियाय।8।   आसुतोस तैं औघड़दानी, अद्भूत तोर बिहाव।
   अजर अमर अविनासी औघड़, अड़हा अमित हियाव।9।
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*कन्हैया साहू "अमित"*
शिक्षक~भाटापारा(छ.ग)
9200252055
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जल चक्र (कुण्डलियाँ)

*🙏जल चक्र ~ (कुण्डली)🙏*
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*बादर ले पानी गिरय,*
                       *धरती मा बोहाय।*
*नँदिया नरवा ढोड़गा,*
                   *तरिया कुआँ भराय।*
*तरिया कुआँ भराय,*
             *भरय जल छलकय भारी।*
*गली खोर मैदान,*
                    *चले पानी के धारी।*
*बरसा जल सकलाय,*
        *अमित सब आखिर सागर।*
*बनके भाप उडाय,*
                    *फेर पानी हा बादर।*
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✍ कन्हैया साहू '"अमित"✍
30/06/2018-भाटापारा